याद पिया की आये...
वो बात मेरी अब सुनते नहीं
मैं ख्वाब उन्ही के बुनती रही
न जाने किस ख्याल में
याद आ जाएँ, मेरी हर सांस
उन्ही की सुनती रही
जब याद पिया की आये
सदन में कोयलिया छुप्ती नहीं
ये बारिश न माने भिगाए
बदरिया थोड़ी झुकती नहीं
जब सांझ सुहानी, अलबेली मैं
उनकी राह तकती हूँ
कब देखो कहाँ से, कैसे आएंगे
असमंजस में भटकती हूँ
रतियन जगमगाती आती है
बरात आशाओं की मुस्कुराती है
उन तारों के बीच में फिर
अँखियाँ उनको ढूँढन लगती हैं
सुबह सुनहरी, फूल जब मुस्कुराने लगते हैं
आपकी विदाई में, मुरझाने लगते हैं
न गम है विदाई का बस गम है जुदाई का
दो पल की कहने हम सिसकते रहते हैं
वो कौन है जिसने तुम्हे मुझसे छीन लिया
चकनाचूर किया मेरे आइनों का किला
न जाने कैसे अभागे भटके
जिनके प्यार को प्यार न मिला

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