जो झेले वही समझे
ये कैसा तेरा साथ प्रिय
मैं कैसे तुझे समझूँ कितना
हिम्मत बंधी पर कमी बड़ी है
खुद को चाहे समझाऊं जितना
पीड़ाओं का दर्द बड़ा
उसमें जब भी ढूंढूं अपना
पाता अकेला खुद को खड़ा
पर आशाएं तुझे न छोड़ें तकना
समझ बूझ से परे है सब
एक भंवर है जिसमें न चाहूँ फंसना
डर मेरा अब तेरी उम्मीेदों से अब
टूटूँ ना, बचूं इस पहाड़ से दबना
चौराहे पे अंधा खोजे
जो झेले वही समझे

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