Wednesday, December 30, 2009

एक दूजे के लिए

धरती - पवन का है अजब प्यार
धरती पर है टिका और
पवन के सहारे चल रहा संसार
पवन बहे और साथ ही रेत उरा ले जाये
बस यूँ कहो पवन की उमंग में
धरती मस्त हो जाये
पवन मदहोश हो 'बनती है आंधी
तब धरती अटल हो लाती है शांति
जब पवन हो बावरी
लहरों को है उकसाती
तब धरती चट्टान बन
तेज़ वेगों को है थामती

जब पवन करे अपने वेग का घमंड
कहे मैं बिजली, रोकने वाले को कठोर दंड
मुझसे ही बनी है पहचान तेरी
मुझसे ही चल रहा जीवन
और मुझसे ही खेत खलिहान बाघ और बन्न
कोई न छुप सका पहुँच से मेरी
मुझ ही से है ज़िन्दगी तेरी
मैं हूँ विश्वव्यापी
चंचल स्वरुप अद्भुत काया मेरी
मुझ तक पहुंचना चुनौती तेरी

धरा का कोई शोर नहीं, सिर्फ ख़ामोशी
बनकर गहरे गर्त और ऊंची चोटी
अहेंकार तोडा पवन का और जीती चुनौती

धरती है अचल, है अडिग
छेर पर अंगार नहीं तो मौन ख़ुशी
धरती कुछ न कहे
अपने में खुश और पीड़ा सहे
पर धरती भी होती मस्त
जब उमंग में पवन बहे
और कहे,
मौन ख़ुशी में खामोश मनन
लुप्त इछाओं से जलता तन्न
आ फिर मिल ऐ ज़िन्दगी
तन्हाई में मेरा जीवन
धरती में पवन की और
पवन में धरती की जान
धरती बिन पवन अनजान
और पवन बिन धरती शमशान