आज एक बार फिर
ना जाने क्यूँ...
बड़े दिनों बाद...
आज एक बार फिर
ये दिल टपक रहा है
बात समझ न आए
जाने क्या बुदबुदाए
फिर एक बार न जाने
क्यूँ सांसें भर्रा रही हैं
चीख तो रहा है कोई बहुत
आवाज़ें क्यूँ नहीं आ रही हैं?
फिर से पलकों में कंपन है
आँखें देखने से इंकार करें
कुछ तो है सामने मेरे
लेकिन दिख नहीं रहा है
एक बार फिर न जाने क्यूँ
मुझे कोई रुकने को कहा है
खींच रहा है पीछे कोई
मुझे कोई नीचे खींच रहा है
चलते-चलते आज एक बार फिर
कोई तो, कुछ तो, ख्याल, याद
इस दिल को डुबाने वाली है
दबी हुई कोई बात आज
बड़े दिनों बाद...
एक बार फिर...
रुलाने वाली है

No comments:
Post a Comment