Friday, January 9, 2026

 राधा मोरी 

मेरी बाँसुरिया लौटायी दे 
ओ राधा मोरी 
मेरी बाँसुरिया लौटायी दए
हम बात करें कैसन तोसे
अरे इधर तो देख
हमसे नैना तो लड़ायी रे 
तुम जानत हु की हम का कहेंगे 
यूँ मुसकायी तू, 
हम एकही बार बताइबे

तू लायिले हमार बछिया
ओका ना लयी जाए घाँस चराए
बस एकही बार हम कहेंगे तुमसे
ऊ बाँसुरी हमका लौटायी दय
 
ना दे माखन की गागरिया हमका
क़सम हम कहत हैं तुम्हारी सौ राधे
हम कभी ना माखन खैबे
और ना हम कभी ना ओका चुराइबे

बस बात कहें हैं हम तोसे 
और वो एकही बात कहेंगे 
ऊ हमार कोयलिया है 
हमका बस ऊ दिलाईदे
बाँसुरिया मोरी हमका दिलाईदे

सुदामा मोरा... सुदामा...!
ना जाने कबसे ना आवा मोरा
ऐ राधे समझ! अच्छा हम ना जाबे
जा अच्छा अब मोरी बंशी तो लाइदे

दुई मुट्ठी दिए आए रहे पिछली बार
ना जाने कबसे बुलाए रहा है
जाएँ ओका दयेखें, बताएँ हम ओका दयेखे
तुम हमारी मूरलिया दो, हम बजाई दे 
समझी की ऊ का कहे रहा है, 
ओका समझाएँ... ऐक बार समझाई दें

ऊ सभई हैं हमार गोपियाँ 
अरे कौनों ना इतना सताए रे 
ओ राधा मोरी! हम बताए तो रहे हैं
कोई ना इत्ता सुहावे, जित्ता तू सताई वे
हमरी बाँसुरिया लौटायी दय
तू हमारी बाँसुरिया लौटायी दे 

" मैय्या देखो कैसन हमका सतायी ये "
हम तुमका कैसन बतायी रे... मैय्या...
जित्ता ई करत हैं उत्ता हमय कोई नहीं सतायी रे 
मैय्या मोरी हमरी बाँसुरिया दिलवायी दे 
राधा मोरी! 

भोर हुई मोर दयेखो काहे इत्ता चिल्लाए रे 
बड़ा अजब है मेरा शीश दरद में, 
और तू ई कोहराम मचाई रे
आ सरकती आत्मा मेरी 
तू ऐसा दर्द दिलाई रे 
मोहनिया तू राधा से 
तू राधा से ऊ बंसिया 
जरूर लयी आओ रे 

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